राजनीतिनामा

मध्यप्रदेश राजनीतिनामा – निर्मला सप्रे पर तस्वीर साफ करने का समय

बीना की कांग्रेस विधायक निर्मला सप्प्रे सागर लोकसभा चुनाव के दौरान राहतगढ़ कस्बे में एक सभा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और तब के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा के हाथों भाजपा का गमछा गले डाला था तब से उनकी सदस्यता को लेकर सवाल खड़े रहे हैं कोर्ट में याचिकाएं लगी है लेकिन अब एक याचिका में हाईकोर्ट ने सरकार विधानसभा अध्यक्ष और निर्मला सप्रे को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि आखिर में किस दल में है।
दरअसल सागर जिले की बिना विधानसभा सीट से कांग्रेस टिकट पर चुनाव जीती निर्मला सप्प्रे कुछ महीने बाद ही लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हो गई लेकिन विधानसभा की सदस्यता ना जाए और फिर से विधानसभा का चुनाव न लड़ना पड़े इसके लिए उन्होंने ना तो इस्तीफा दिया और ना ही कांग्रेस पार्टी ने उनको पार्टी से निकला दल बदल कानून के तहत यदि ऐसा होता तो उनकी सदस्यता चली जाती और उन्हें चुनाव का सामना करना पड़ता है अब तक जो भी आरोप प्रत्यारोप लगाते रहे हैं उस भले ही वे बचती रही हो लेकिन अब हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर प्रदेश सरकार में और निर्मला सप्रे को नोटिस कर जवाब मांगा है नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने में विधानसभा अध्यक्ष से पूछा है कि इस मामले में क्या कार्रवाई हो की गई मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। बहरहाल शुक्रवार को हाईकोर्ट में विधानसभा अध्यक्ष के वकील ने तर्क दिया कि मामले की सुनवाई डिवीजन बेंच में नहीं हो सकती इस तर्क को खारिज करते हुए भी कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी कर पूछा है कि निर्मल को दल बदल मामले में अयोग्य घोषित करने वाली याचिका पर १० दिन में निर्णय करना चाहिए था लेकिन 16 महीना में निर्णय क्यों नहीं किया कोर्ट ने 18 नवंबर तक विधानसभा अध्यक्ष मध्य प्रदेश सरकार और निर्मला सप्रे से जवाब मांगा है नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही हे लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के मंच पर पहुंची निर्मला सप्रे जो कि कांग्रेस की विधायक है कांग्रेस ने अपनी ही पार्टी की विधायक के खिलाफ हाई कोर्ट में आज का लगाई है कांग्रेस लगातार मांग कर रही है कि निर्मला ने दल बदल किया है इसलिए उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द की जाए

निर्मला लोकसभा चुनाव के दौरान 2024 को भाजपा के मंच पर मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के साथ मंचा सिंह रही लेकिन औपचारिक रूप से उन्होंने भाजपा की सदस्यता नहीं ली और इसी कारण आधिकारिक तौर पर अभी वह कांग्रेस की विधायक है तव सपने में यह भी कहा था कि बीना के विकास के लिए वह भाजपा के साथ आई हे भाजपा नेता और निर्मला सप्रे अब तक इस प्रश्न से बचते रहे हैं कि वह अखिर किस दल में है शुक्रवार को ही भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान जब एक पत्रकार ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल से पूछा कि निम्नला सप्रे भाजपा में है या नहीं तो उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के 164 विधायक है उनके नाम पूछेंगे तो मैं बता दूंगा अब कौन किस दल में है यह उसी से पूछो वही बताएंगी।
कुल मिलाकर विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन जाहिर 7 जुलाई 2024 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने निर्मला सप्रे के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को सदस्यता खत्म करने का
आवेदन दिया था विधानसभा अध्यक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष को करीब ढाई महीने बाद जब आया कि आपकी याचिका के दस्तावेज गुम हो गए हैं तब नेता प्रतिपक्ष ने दोबारा याचिका से संबंधित दस्तावेज स्पीकर को भेजे जुलाई से 90 दिनों में जब स्पीकर की ओर से कोई सप्रे की सदस्यता को लेकर निर्णय नहीं हुआ तो 28 नवंबर 2024 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने इंदौर हाई कोर्ट में याचिका लगाई इंदौर हाई कोर्ट ने पहली सुनवाई 9 दिसंबर 2024 की तारीख दी और 9 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए विधानसभा अध्यक्ष और बीना विधायक को नोटिस जारी किए।सुनवाई की तारीख 19 दिसंबर तय की गई 19 दिसंबर को सरकार ने हाई कोर्ट से इंदौर की जगह जबलपुर में सुनवाई की मांग की गई इसके बाद इंदोर हाई कोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की याचिका को खारिज कर दिया नेता प्रतिपक्ष ने प्रिट्सियन दायर की थी इसी के आधार पर यह निर्णय हुआ है है अब निर्मला सप्रे के मामले में सरकार विधानसभा अध्यक्ष और निर्मला सप्रे को तस्वीर स्पष्ट करना ही पड़ेगी कि आखिर वह किस दल में है।

देवदत्त दुबे  

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