राजनीतिनामा

मध्यप्रदेश: तपती दोपहर और सत्ता सुख प्राप्ति के दुर्लभ नक्षत्र योग…

यह मध्यप्रदेश की राजनीति का एक दुर्लभ संयोग ही है कि यहां सत्ता चयन और सत्ता सुख भोगने वाले नक्षत्र तो सुहावनी ठंड में मिलते है लेकिन उसे प्राप्त करने के लिये जो तपस्या आरंभ करनी पड़ती है उसका मर्हूत अप्रेल मई की चिलचिलाती धूप में ही निकलता है । खैर ये राजकाज की एकमात्र एंसी प्रक्रिया है जिससे नेता अधिक परेशान होते है और जनता कम । तो मध्यपद्रेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिये दोनो ही दलों ने एंसी विकट गर्मी में सदन से लेकर सड़क तक कड़ी मेहनत करने का मन बना लिया है । जहां भाजपा में शिवराज सरकार को उनकी अंतिम पारी समझकर भविष्य के र्स्वणिम स्वप्न देखने वाले दिग्गज प्रतिद्धंदियों के लिये 2023 के विधानसभा चुनाव करो या मरो की तर्ज पर महत्वपूर्ण है इसी को ध्यान में रखकर भाजपा अपने डेढ़ दशक की उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जाने की पूरी तैयारी में है ।  तो बसंत की धूप और होली के रंगो से मात खाई कांग्रेस फरवरी 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद पहली बार सोमवार को कांग्रेस के दिग्गज आपसी मतभेद और मनभेद भुलाकर एक साथ बैठे अगले चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की चर्चा में सबसे महत्वपूर्ण बयान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की तरफ से आया उन्होने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री,नेताप्रतिपक्ष,और कांग्रेस प्रदेशअध्यक्ष कमलनाथ ही कांग्रेस की ओर से आगामी विधानसभा चुनावों में प्रमुख चेहरे होंगे और उनके ही नेतृत्व में हम 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।
बैठक में मौजूद तीन अन्य पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव कांतिलाल भूरिया और सुरेश पचौरी सहित पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भी सिंह के इस बयान से सहमति जताई जो पिछले कुछ समय से कमलनाथ के नेतृत्व पर सवाल उठाने के सवालों से परेशान मध्यप्रदेश कांग्रेस के लिये एक सुखद संकेत है।  बैठक में जनता के बीच जाकर कांग्रेस सरकार की 15 महीनों की उपलब्धियों और उनके फायेदे गिनाने की बात बनी तो एकराय से सभी जिलों में एक साथ जाएंगे अंबेडकर जयंती पर पूरे प्रदेश में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के हितों के कार्यक्रम आयोजित करेंगे । बैठक में नेताओं ने तय किया कि पार्टी 2023 का विधानसभा चुनाव पार्टी शिवराज सरकार कुशासन भ्रष्टाचार किसानों के संकट और दूसरे आर्थिक सामाजिक मुद्दों पर लड़ेगी प्रदेश की जनता के महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने के लिए आंदोलन की विस्तृत कार्य योजना तैयार कर ली गई है और जल्दी प्रदेश की जनता देखेगी कि कांग्रेस पार्टी के सड़क से लेकर विधानसभा तक पूरे प्रदेश में जनता के मुद्दों पर आंदोलन खड़ा करेगी सोमवार को ही युवा कांग्रेस की हुई महत्वपूर्ण बैठक में कमलनाथ ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि इस बार युवा कांग्रेस ही हमारी सत्ता में वापसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। और यह सच भी है यदि युवा वर्ग किसी मुददे को लेकर सड़क पर आंदोलन करता है तो उसका जोश जुनून और उर्जा उम्रदराज नेताओं से अधिक प्रभावी और कारगर होती है।  सागर जिले में शिक्षक वर्ग 3 पेपर के स्क्रीनशाट लीक होने के मामले में व्यापम और राजस्व मंत्री राजपूत के खिलाफ रविवार को किया गया एनएसयूआई का प्रभावी प्रदर्शन इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
अब दोनो दलों के द्धारा किये गये इस संकल्प की साधना और परिणति जो भी हो लेकिन एक बात तय है कि मध्यप्रदेश में अन्य राज्यों की तुलना में भाजपा के लिये सत्ता में वापसी आसान नहीें है जिसके पीछे कई कारंण है जिसमें अन्य प्रदेशों की तुलना में मध्यप्रदेश में कोई भी तीसरा दल इतना मजबूत नहीं है जो कांग्रेस के वोटबैंक को नुकसान पहंुचाकर भाजपा को फायदा दिला सके । इसके अतिरिक्त उपचुनाव में भले ही भाजपा ने जीत दर्ज की हो लेकिन सत्ता परिर्वतन के तरीके पर आज भी जनता के एक बड़े वर्ग में कांग्रेस से अधिक पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के प्रति सुहानूभूति का भाव है । और इनसे इतर एक और महत्वपूर्ण कारक महंगाई है । बढती मंहंगाई से त्रस्त जनता लोकसभा और केंद्र में तो नरेंद्र मोदी और भाजपा की सर्मथक है लेकिन उन्हे सबक सिखाने के लिये या अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिये राज्यों में वह भाजपा के खिलाफ भी वोट कर सकती है । मध्यप्रदेश , राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हम पहले भी एंसा देख चुके है।

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