राजनीतिनामा

मध्यप्रदेश राजनीतिनामा – दरार पाटने में जुटी भाजपा

दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर प्रदेश के दोनों प्रमुख दल लगातार कसरत कर रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी घोषित होने के बाद दतिया में जो बवाल मचा था, वह अब थम गया है। नरोत्तम मिश्रा के नरम तेवर रणनीति को देखते हुए इंतजार कर रही थी। क्योंकि भाजपा ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को दतिया विधानसभा उपचुनाव का प्रभारी बनाया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस ने इसी रणनीति के तहत दतिया राजघराने से प्रत्याशी उतारा है। और भाजपा की कार्यकर्ताओं के प्रति नरमी भी सामने आ गई है। कांग्रेस ने भी घनश्याम सिंह को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। घनश्याम सिंह का नाम लगभग तय था, लेकिन कांग्रेस भाजपा की दरअसल, दतिया विधानसभा का उपचुनाव दिन-प्रतिदिन हाई प्रोफाइल होता जा रहा है। खासकर सोमवार शाम को भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी घोषित किया। इसके बाद दतिया में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने दतिया-झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम किया, भाजपा जिला कार्यालय का घेराव किया और पुलिस पर पथराव भी हुआ। दतिया बंद रहा तथा 25 से अधिक कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज की गई। पूरे घटनाक्रम की गूंज प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सुनाई दी। इसके बाद नरोत्तम मिश्रा भोपाल पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री निवास पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के साथ उनकी बैठक हुई। बैठक में दतिया विधानसभा उपचुनाव की तैयारियों एवं संगठनात्मक विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान यह तय किया गया कि पार्टी सर्वोपरि है और सभी कार्यकर्ता संगठन के निर्णय के साथ पूर्ण प्रतिबद्धता से खड़े रहेंगे। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि दतिया चुनाव को लेकर कुछ कार्यकर्ताओं ने भावावेश में इस्तीफे दिए थे, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी ने तय किया है कि किसी भी कार्यकर्ता का इस्तीफा स्वीकार नहीं होगा। सभी कार्यकर्ता पूर्ण एकजुटता, उत्साह और समर्पण के साथ पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को प्रचंड बहुमत से विजयी बनाने के लिए चुनाव प्रचार में जुटेंगे और भाजपा दतिया का चुनाव रिकॉर्ड मतों से जीतेगी।

हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा पार्टी के वरिष्ठ एवं सम्मानित नेता हैं। उनके मार्गदर्शन में भाजपा दतिया उपचुनाव लड़ेगी और भारी बहुमत से जीत दर्ज करेगी। बहरहाल, दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का कल अंतिम दिन है। अभी तक प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किए हैं। लेकिन जिस तरह से दतिया में घमासान हुआ है, उससे यह उपचुनाव काफी रोचक हो गया है। दोनों दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। भाजपा में बड़ा उलटफेर उस समय हुआ, जब स्वयं को संभावित प्रत्याशी मानकर चुनाव प्रचार कर रहे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को झटका देते हुए पार्टी ने वर्षों तक संगठन मंत्री रहे आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर दिया। लगभग 24 घंटे बाद बवाल तो थम गया, लेकिन पार्टी को हुए राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिए उसे काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। हालांकि अभी अधिकृत घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चर्चा है कि केंद्रीय मंत्री एवं चंबल क्षेत्र के प्रभावशाली नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को दतिया विधानसभा उपचुनाव का प्रभारी बनाया जा रहा है। कांग्रेस ने दतिया राजघराने के पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में कांग्रेस के राजा की काट के लिए भाजपा महाराजा को मैदान में उतार रही है। मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक के बाद माना जा रहा है कि नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थक अव पहले की तरह पार्टी के लिए सक्रिय होकर काम करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष ने भी स्पष्ट किया है कि किसी भी कार्यकर्ता का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा। कुल मिलाकर, भाजपा जहां दतिया में संगठन के भीतर आई दरार को पाटने में जुटी है, वहीं कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को प्रत्याशी बनाकर मुकाबले को रोचक बनाने की कोशिश की है। साथ ही वह भाजपा की बदलती रणनीति पर लगातार नजर बनाए हुए है। कांग्रेस की सबसे बड़ी चिंता ऐसा प्रत्याशी उतारने की थी, जो भाजपा के प्रभाव या दबाव में आए बिना पूरी ताकत से चुनाव लड़ सके। जाहिर है, दतिया विधानसभा का उपचुनाव जिस तरह हाई प्रोफाइल होता जा रहा है, उससे प्रदेशभर की निगाहें अब दतिया पर टिक गई हैं।

@ देवदत्त दुबे 

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