निरोगी-काया

कोरोना की तरह गौवंश पर लम्पी वायरस का कहर

भोपाल। जिस तरह से कोरोना महामारी ने मानव जाति पर कहर बरपाया था कुछ उसी तरह से लंपी वायरस का कहर इस समय गाय पर बरप रहा है। राजस्थान, गुजरात, पंजाब में इस बीमारी से लाखों गाय मर चुके हैं और अब यही बीमारी प्रदेश के 26 जिलों में पहुंच चुकी है ।  दरअसल, मानव जीवन पर जब कोरोना का कहर आया था तो चारों तरफ हाहाकार मच गया था जिससे जो बना अधिकतम प्रयास भी किए इसके बावजूद अब तक लाखों लोगों की मौत हो चुकी है। कुछ इसी तरह भूख पशु कहे जाने वाले गाय पर संकट आया है जिससे देश में अब तक हजारों गाय मर चुकी है और यह बीमारी प्रदेश में भी 26 जिलों तक पहुंच चुकी है। राजस्थान बॉर्डर के जिलों मंदसौर, रतलाम, नीमच, राजगढ,़ आगर, मालवा, उज्जैन, शाजापुर से शुरू होकर अब खंडवा, इंदौर, धार, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, हरदा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर होती हुई, नर्मदापुरम हरदा और बैतूल तक जा पहुंची है और यदि समय रहते तेजी से बचाव के उपाय नहीं किए पूरे प्रदेश को अपनी गिरफ्त में ले सकती है।

हालांकि स्थिति की भयावहता को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को सुबह महत्वपूर्ण अधिकारियों के साथ बैठक की एवं वैक्सीन को निशुल्क लगाने के आदेश दिए साथ ही सरकार ने टोल फ्री नंबर भी जारी किया है लेकिन जरूरत है इस समय अतिरिक्त साधन और स्टाफ की जो सूचना आने पर तुरंत उस जगह पर पहुंचकर इलाज शुरू कर सके और बाड़े बंदी भी ऐसी हो जिससे संक्रमित जिलों से दूसरे जिलों में संक्रमण ना फैल सके अन्यथा पशुधन का नाश तो होगा ही इसका मानव जीवन पर भी गंभीर असर पड़ेगा मालवा क्षेत्र में दूध का संकट बढ़ सकता है क्योंकि यहां जो लोग दूध उत्पादक है वही अब दूध खरीद रहे हैं क्योंकि उन्हें संक्रमण का डर है।

कुल मिलाकर सभी को सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है जहां कहीं भी लम्पी वायरस के लक्षण किसी गाय मैं देखें तुरंत सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए टोल फ्री नंबर 1962 और 07 55 276 75 83 पर सूचित करें जिससे तुरंत इलाज शुरू किया जा सके क्योंकि गाय पर आया यह संकट भयावह है और इससे मानव जीवन भी प्रभावित हुए बगैर नहीं रह सकता स्थिति ज्यादा बिगड़े इसके पहले सभी को अपने अपने स्तर पर प्रयास करना चाहिए। सरकार भी अतिरिक्त चिकित्सकों की टीम तैयार करें और जहां से भी सूचना आती है वहां पर तुरंत पहुंचे। जो भी गोपालक अपनी गायों को खुले में ना छोड़े और उन पर नजर रखें। यदि किसी पशु को बुखार आने लगता है, पैरों में सूजन आ जाती ह,ै मुंह से लार और आंख नाक से पानी आता है, पूरे शरीर में घाव हो जाते हैं, वजन कम होने लगता है, दूध आना बंद हो जाता है और गाय पैरों को पीटने लगती है। इनमें से शुरुआती कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज की व्यवस्था करें।

देवदत्त दुबे भोपाल 

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