राजनीतिनामा

मध्यप्रदेश में प्रभारी होंगे प्रभावी !

भोपाल। मिशन 2023 की तैयारियों में जुटे दोनों ही प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस मैं प्रदेश प्रभारियों को प्रभावी भूमिका में रखता आया है। इस बार कांग्रेस में जहां दिल्ली के पूर्व सांसद जयप्रकाश अग्रवाल को प्रदेश प्रभारी बनाया गया है वहीं भाजपा में प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव के साथ दो सह प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। पंकजा मुंडे के अलावा अब डॉक्टर राम शंकर कठेरिया सांसद को भी सह प्रभारी बनाया गया है चुनावी वर्ष में जमीनी जमावट करने और कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों को तवज्जो मिलने लगे इसके लिए प्रभारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

दरअसल भाजपा में पूरे देश में बदलाव का सिलसिला थम नहीं रहा है और जब भी बदलाव की कोई सूची आती है। उसमे मध्य प्रदेश भी कहीं ना कहीं प्रभावित हो जाता है जब केंद्रीय चुनाव समिति का पुनर्गठन हुआ तब उसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बाहर हो गए और शुक्रवार को विभिन्न राज्यों के प्रदेश प्रभारी बदले गए उसमें मध्य प्रदेश को सांसद डॉक्टर रामशंकर कठेरिया के रूप में नए सह प्रभारी मिले राजस्थान अरुण सिंह और मध्य प्रदेश के मुरलीधर राव इस परिवर्तन से आप प्रभावित रहे। भाजपा में बदलाव का सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश से अलग हुए छत्तीसगढ़ राज्य पर पड़ा है जहां पिछले 2 महीने में 3 बड़े चेहरे बदल दिए गए प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव की जगह अरुण साब नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक की जगह नारायण चंदेल और प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी की जगह ओम माथुर को बनाया गया है जोकि कुछ दिनों पहले केंद्रीय चुनाव समिति में भी शामिल किए गए थे और संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं संघ में प्रचारक रहे हैं और इनकी संगठन क्षमता बेजोड़ है माना जा रहा है।

2018 के विधानसभा के चुनाव में राजस्थान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार नहीं बन पाई थी हालांकि मध्यप्रदेश में डेढ़ साल के बाद ही सरकार की वापसी हो गई लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व की निगाहों में तीनों ही राज्य  2023 – 2024 के लिए महत्वपूर्ण है।

इस कारण जिस भी राज्य में जो भी जरूरी समझ में आ रहा है। पार्टी नेतृत्व बदलाव करने में कोई संकोच नहीं कर रहा है शुक्रवार को पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा छत्तीसगढ़ में थे और पुरंदेश्वरी उस बैठक में थी तभी बदलाव की सूचना आ गई यही कारण है भाजपा में कोई भी अपने आप को निश्चिंत नहीं मानता कब किसके लिए फरमान आ जाए।

बहरहाल प्रदेश में प्रदेश प्रभारी दोनों ही दलों भाजपा और कांग्रेस में चुनावी वर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका में आ जाते हैं। इस कारण प्रभावी प्रदेश प्रभारी भेजे जाते हैं सत्तारूढ़ दल भाजपा में प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव लगातार प्रदेश में सक्रिय भी रहते हैं और संगठन की जमावट भी कर रहे हैं उनके साथ सह प्रभारी पंकजा मुंडे भी बैठकों में उपस्थित रहती है और अब एक और सह प्रभारी के रूप में सांसद डॉ राम शंकर कठेरिया की नियुक्ति हुई है जोकि उत्तर प्रदेश से हैं और संगठन का अच्छा खासा अनुभव रखते हैं। प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा जिस तरह से मैदान में सक्रिय हैं प्रभावी प्रदेश प्रभारी होने से 2023 की तरफ भाजपा मजबूती से कदम बढ़ा रही है।

दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस में अब तक वन मैन शो के रूप में प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ काम कर रहे हैं वे लगातार 2023 में प्रदेश में सरकार बनाने का दावा भी कर रहे 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले दीपक बाबरिया प्रदेश प्रभारी थे जिन्होंने मंडलम और सेक्टर के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी साथ ही टिकट वितरण में भी उनके फीडबैक का पार्टी को फायदा मिला था लेकिन हाल ही में  हटाए गए प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक से पार्टी को बहुत उम्मीदें थी लेकिन उनकी दिल्ली में भी आवश्यकता है और व्यस्तता भी है जिसके कारण वह  पर्याप्त समय प्रदेश को नहीं दे पा रहे थेइस कारण उनकी जगह है।

शायद यही कारण मुकुल वासनिक की जगह एक समय दिल्ली के दमदार नेता माने जाने वाले चार बार सांसद रह चुके जयप्रकाश अग्रवाल को प्रदेश प्रभारी बनाया गया है अब देखना यही है अग्रवाल पार्टी कार्यकर्ताओं में कितना समन्वय बना सकते हैं और पार्टी नेताओं के साथ किस तरह कदमताल करते हैं।

कुल मिलाकर प्रदेश में दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने प्रदेश प्रभारी यों को प्रभावी बना कर भेजा है जिससे 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी बेहतर प्रदर्शन कर सकें लेकिन पार्टी के निर्णय कितने कामयाब रहेंगे यह तो वक्त ही तय करेगा।

 

देवदत्त दुबे, भोपाल, मध्यप्रदेश 

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