राजनीतिनामा

अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की लड़ाई में गांधी परिवार की एंट्री

इंडिया गेट पर माता-पिता से मिले राहुल-प्रियंका

सवाल अब भी कायम—आखिर कौन है वह कथित वीआईपी, जिसका नाम सामने आने का इंतजार कर रहा है अंकिता का परिवार?

नई दिल्ली। भारतभवः 

उत्तराखंड की अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। बुधवार शाम कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने इंडिया गेट पहुंचकर अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की और उन्हें न्याय की लड़ाई में समर्थन देने का भरोसा जताया।अंकिता के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि इस मामले में कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े सवालों का जवाब सामने आए और जांच के जरिए सच उजागर हो।

अंकिता भंडारी उत्तराखंड के एक होटल में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। मामले को लेकर सामने आए आरोपों के अनुसार, एक कथित वीआईपी को विशेष सेवाएं देने से इनकार करने के बाद उनकी हत्या कर दी गई। हालांकि, इस कथित वीआईपी की पहचान और मामले में उसकी भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर आधिकारिक रूप से अंतिम निष्कर्ष सामने आना जरूरी है। अंकिता का परिवार लगातार इस मामले में जवाबदेही और पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है। परिवार की चिंता सिर्फ दोषियों को सजा दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी सवालों का जवाब पाने की भी है, जो अब तक अनुत्तरित हैं।

राष्ट्रपति से भी लगाई गुहार

अंकिता के माता-पिता ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी अपील की है कि सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति पर रोक लगाने या उसे रद्द करने पर विचार किया जाए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दुष्यंत कुमार गौतम को 12 अक्टूबर को राज्यपाल नियुक्त किया गया था। हालांकि, इस मामले में किसी कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर आरोपों और आधिकारिक रूप से स्थापित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है। दुष्यंत कुमार गौतम का नाम सामने आने को लेकर परिवार की ओर से सवाल उठाए जाने मात्र से किसी की संलिप्तता साबित नहीं होती। इसका निर्धारण निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होना चाहिए।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की अंकिता के माता-पिता से मुलाकात ने इस मामले को फिर से राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श में ला दिया है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू राजनीति नहीं, बल्कि एक परिवार की वह पीड़ा है, जो अपनी बेटी की मौत के बाद आज भी न्याय और जवाबों की प्रतीक्षा कर रहा है।

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