लोकसभा चुनाव 2024 ने भारत के लोकतंत्र की मजबूती का शानदार उदाहरण पेश किया है जहां किसी भी एक राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है केंद्र में गठबंधन की सरकार है और संसद में एक मजबूत विपक्ष भी तैयार है देश के कई हिस्सों में बड़े राजनैतिक बदलाव हुए है लेकिन इन आम चुनावों में जम्मू काश्मीर ने देेश को चौकाया है क्या काश्मीर की राजनीति अब बदलाव चाहती है लोकसभा चुनाव के परिणाम तो इसी तरफ ईशारा कर रहे है घाटी में इस बार जिस प्रकार लोगों ने मतदान किया है उससे साफ है कि काश्मीर के लोगो ने अब पारंपरिक राजनैतिक दलों और स्थापित नेताओं की जगह नये विकल्प तलाशना शुरू कर दिये है। तभी काश्मीर के दो सबसे बड़े दल नेशनल कांफ्रेस और पीडीपी के लिये यह नतीजे एक चेतावनी की तरह है । लोकसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस के सबसे बड़े नेता उमर अबदुल्ला को बारामुला लोकसभा सीट से हार का सामना करना पड़ा तो पीडीपी के मुखिया महबूबा मुफती को अनंतनाग लोकसभा सीट से हार का सामना करना पड़ा है । जिस तरह इन दोनो नेताओं की हार हुई है उससे साफ है कि दशकांे तक काश्मीर में राज करने वाली इन दोनो पार्टियों से अब लोग नाराज है और बदलाव चाहते है।
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