देश की सरकार सचमुच सनातन है इसीलिए संडे यानि रविवार को भी सीतारामी बजट लाना नहीं भूली. महाराष्ट्र में वैधव्य का अहसास करने से पहले ही उन्हें डीसीएम बनानना नहीं भूली.सरकार जो भूलती है, उसके ऊपर उंगली उठाना गुनाह है, राष्ट्रद्रोह जैसा संगीन गुनाह.दर असल इस सीतारामी बजट में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे देखकर खुशियाँ मनायी जा सकें. मुझे उम्मीद थी कि बजट में कुछ तो लोक लुभावन होगा लेकिन मैं गलत था. चालू भाषा में कहूं तो इस बजट मेंइलाज सस्ता हो सकता है क्योंकि कैंसर-डायबिटीज़ जैसी lजीवन रक्षक दवाइयाँ सस्ती हो सकती हैं.देश में बने फोन, टीवी इलेक्ट्रॉनिक्स पर टैक्स राहत से मेक इन इंडिया को धक्का लगा है. तंबाकू, पान मसाला, शराब पर टैक्स बढ़ा है क्योंकि सरकार को आपकी सेहत और अपने सेहत खजाने को भरने की चिंता है.मध्यम वर्ग को खुश करने के लिए विदेश यात्रा, पढ़ाई, इलाज पर टीसीएस घटाकर 2 फीसदी कर दिया गया है.मिडिल क्लास खुश।ईलेक्ट्रीकल वाहनों और सोलर को बूस्ट देने के लिए बैटरी, सोलर इनपुट सस्ते किए गये हैं.ग्रीन एनर्जी पर फोकस जो है.बजट प्रावधानों से देश के स्टॉक मार्केट वालों को झटका लगा और एफ एंड ओ में एसटीटी बढ़ने से ट्रेडरों की भौंहें तन गईं.
सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर पर पैसा-ही-पैसा लुटाने की बात कही है.12 लाख करोड़ से ज़्यादा कैपेक्स तथा हाई-स्पीड रेल कॉरिडोरबनाने का इरादा है.इस साल के सीतारामी बजट में कोई बड़ा टैक्स बम नहीं फोडा गया.इनकम टैक्स स्लैब में भी कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया गया. मतलब “न राहत, न मार” वाला बजट है ये. एक लाइन में कहूं तो इस बजट में गरीब-मरीज को राहत, मिडिल क्लास को संतुलन, ट्रेडर को झटका दिया गया है.सरकार का फोकस इंफ्रा और मेक इन इंडिया पर है और पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी.बजट में 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर, 3 आयुर्वेदिक एआईएम एस , मेडिकल टूरिज्म सेक्टर को भी बूस्ट देने का ऐलान किया गया है.बजट पर मोदी जी कहते हैं कि सरकार का इरादा हर घर लक्ष्मी जी को पहुचाने का है.सरकार ने वित्त वर्ष 2027के लिए पूंजी खर्च 12.2 लाख करोड़ रुपए से ऊपर रखने का लक्ष्य रखा है.यह बुनियादी ढांचे, सड़क, रेलवे और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश को बढ़ाता है.फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी का ~4.3–4.4 प्रतिशत रखा गया है, जिससे वित्तीय स्थिरता का संकेत मिलता है.बजट में पहले से घोषित नई टैक्स स्लैब और नई आयकर अधिनियम 2025 लागू करने की घोषणा को आगे बढ़ाया गया —वर्तमान में मुफ्त कर सीमा अपरिवर्तित रखकर नियम आसान किए जा रहे हैं। मजे की बात ये है कि बजट में समझने और समझाने के लिए कुछ खास नहीं है. अगर आप राष्ट्रभक्त हैं तो सरकार की जय बोलिए और अगर नहीं तो चुप बैठिये. बोले तो देशद्रोही ठहरा दिए जाओगे.
श्री राकेश अचल ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक समीक्षक, मध्यप्रदेश
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