युवा का उल्टा केवल वायु लिखा नहीं जाता है बल्कि भारतीय राजनीति में युवा देश में वायु अर्थात वातावरण बनाने का काम करते थे लेकिन संघर्ष की धार सुविधाओं ने मौथली कर दी प्रत्यक्ष प्रणाली से होने वाले छात्र संघ के चुनाव अब बंद हो गए हैं ऐसे में राजनीतिक दलों में नियुक्त होने वाले युवा संगठनों के नेता पार्टी के नियमों और बंधनों बंध कर रह गए।दरअसल एक दौर था जब युवाओं का भारतीय राजनीति में दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका हुआ करती थी युवा तुर्क नाम दिए जाते थे लेकिन वक्त के साथ वह नर्सरी ही बंद हो गए जहां युवा नेता पैदा हुआ करते थे अब कंवल राजनीतिक दलों के जो युवा संगठन है उनमें युवाओं को मनोनीत करके कमान सौंप जाती है और उसमें भी पार्टी के नियम कानून और इतनी बंदिशें होती हैं कि केवल औपचारिकता जैसी स्थिति बनती है यहां तक कि युवाओं को अपनी टीम गठित करने के लिए भी फ्री हैंड नहीं होता संगठन से जो नाम आते हैं उनको जारी करके अपना काम चलाते हैं। बहरहाल मध्य प्रदेश की राजनीति में दोही डाल सत्ता में आते जाते रहते हैं और पिछले दो दशक से तो भाजपा सरकार में है केवल 2018 में डेढ़ वर्ष के लिए कांग्रेस सरकार में आई थी इसके पहले जब भाजपा विपक्ष में हुआ करती थी तब भारतीय जनता युवा मोर्चा में जो युवा काम करते थे उनमें से अधिकांश आज केंद्र और राज्य में मंत्री हैं विधायक सांसद हैं पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर पदाधिकारी है। उसे समय भारतीय जनता युवा मोर्चा संघर्ष का पर्याय माना जाता था लेकिन जब से भाजपा के दिशा निर्देशों पर चलने वाले हो गए हैं प्रदेश में सरकार आई है युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अब पार्टी हैं हाल ही में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए श्याम टेलर नियुक्त होने के डेढ़ महीने बाद भी अपनी नई टीम गठित नहीं कर पाए बल्कि भी कहते हैं कि यह निर्णय पार्टी संगठन लगा भाजपा में सामूहिक नेतृत्व के आधार पर निर्णय लेने की परंपरा है इसलिए में अपने स्तर पर तय नहीं कर सकता नई टीम कब तक बन जाएगी और इसमें किन किन लोगों को मौका मिलेगा यह टीम घोषित होने के बाद ही पता चलेगा और तब कहा जाएगा पार्टी ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाते हुए टीम बनाई है। दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस का यूथ संगठन युवक कांग्रेस की मध्य प्रदेश में वर्षों तक धमक रही है युवक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का रुतवा हुआ करता था यहां तक की जब जुलूस या नेताओं का आगमन होता था तब हंगामा ना हो ऐसा हो नहीं सकता था लेकिन वक्त के साथ युवक कांग्रेस की भी धार मौथली पड़ गई। खासकर जब से युवा कांग्रेस में चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई युवा कांग्रेस से उस समय के निकले युवा आज कांग्रेस पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका में है या जो दल बदल कर दूसरे दल में चले गए वह भी महत्वपूर्ण भूमिका में बने हुए हैं मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया को बने हुए भी लगभगदो माह होने को है तब चुनावी प्रक्रिया के तहत ही 147 पदाधिकारी चुने गए थे लेकिन नई कार्यकारिणी अभी तक गठित नहीं कर पाए यहां तक की बैठकों में गुटबाजी साफ तौर पर देखने को मिली कांग्रेस पार्टी ने युवा कांग्रेस को पंचायत चलो अभियान की जिम्मेदारी दी है लेकिन पूरी तरह से टीम गठित होने के कारण आधे अधूरे युवा ही मैदान में नजर आ रहे हैं।
कुल मिलाकर प्रत्यक्ष प्रणाली से विश्वविद्यालय में छात्र संघ के चुनाव न होने के कारण युवा राजनीति की नर्सरी पहले ही बंद हो गई है दूसरे राजनीतिक दलों में अब युवाओं को कमान जिस प्रक्रिया की तरह सौपी जाती है।उसमें कोई चमत्कारिक नेतृत्व दिखाई देगा इसकी उम्मीद भी नहीं है तीसरी रही रही सही कसर कमान संभालने वाले युवाओं में वह इच्छा शक्ति नहीं रही कि वे कुछ सकारात्मक दिशा में कार्य कर सके अन्यथा पार्टी की गाइडलाइन के अलावा भी युवाओं को नशे से मुक्त करने पर्यावरण के क्षेत्र में शिक्षा में युवाओं की मदद जैसे काम ऐसे हैं।और जिसमें पार्टी की कोई गाइडलाइन भी आडे नहीं आएगी और सक्रियता भी बनी रहेगी बशर्ते युवा कुछ करना चाहे और यदि ऐसा करते हैं तो फिर से युवाओं को वायु बदलने वाला कहा जा सकता है अन्यथा युवा नेतृत्व की हवा निकल चुकी है भविष्य में नैसर्गिक नेतृत्व कहां से मिलेगा यह एक यक्ष प्रश्न भी सबके सामने है।
श्री देवदत्त दुबे ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक समीक्षक, मध्यप्रदेश
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